The Association of Strong Women Alone for Widows and Separated Women : Ekal Nari Shakti Sangathan, Udaipur, Rajasthan, India
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एकल नारी शक्ति संगठन

"राजस्थान, भारत में
गरीब विधवा, परित्यकता
व अन्य एकल महिलाओं
का जन-आधारित
विशाल संगठन
जो संगठन व जागरूकता के
माध्यम से आगे बढ़ता ही जा रहा है..."

एक दिन ऐसा आयेगा, और भी आंखे देखेगी ।
एक दिन ऐसा आयेगा, और जुबाने बोलेगी ।।
एक दिन ऐसा आयेगा, जब ये आवाजें गूजेंगी ।

एक नयी दुनिया मुमकिन है ।
एक नयी दुनिया मुमकिन है।।


सफलता

एकल नारी शक्ति संगठन की सफलताएं:
संगठन सदस्याओं द्वारा एकल महिलाओं की मांगो को लेकर समय-समय पर सरकार, समाज व जनप्रतिनिधियों के साथ पैरवी की जाती है जिसके परिणाम कुछ इस प्रकार है-
सरकार के साथ निति बदलाव मे उपलब्धियां:-
1. सरकार द्वारा आदेश जारी किये जा चुके हैं कि सूखा एवं राहत कार्यों में विधवा एवं परित्यकता महिलाओं को प्राथमिकता दी जायेगी।
2. सरकारी विद्यालयों में नर्सरी से 12वीं तक विधवा व परित्यकता महिलाओं के पुत्र एवं पुत्री की सम्पूर्ण विद्यालय शुल्क माफ किया जायेगा।
3. सरकार ने विधवा महिला के पुत्री को विवाह के समय सहायता राशि पांच हजार रुपए से बढ़ाकर दस हजार रुपए कर दी है।
4. जब संगठन की शुरुआत हुई तब विधवा पेंशन 125 रुपये थी, संगठन ने एडवोकेसी के माध्यम से 1000 रुपए की मांग की जो वर्तमान में बढ़कर 500 रु. हो चुकी है। वृ़द्वावस्था व विधवा पेंशन के अन्तर्गत पेंशन की पात्रता हेतु पेंशनर के परिवार में 25 वर्ष या उससे अधिक होने की शर्त समाप्त कर दी गई है।
5. वृद्वावस्था पेंशन 75 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिये 750 रु. की गई है।
6. बीपीएल श्रेणी में आने वाली सभी विधवा व वृ़द्ध महिलाओं को बिना किसी नियम के पेंशन शुरु हुई।
7. परित्यकता जिनका कोर्ट से तलाक नही हुआ है उन्हें परिभाषित करते हुए उनके लिये भी 500 रु. पेंशन की व्यवस्था की गई है।
8. मानदेय पर कार्यरत आशा सहयोगिनी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, साथिन आदि सामाजिक सुरक्षा योजना की पात्रता रखती है तो वे पेंशन लेने की पात्र होगी।
9. राजस्थान में मुस्लिम समुदाय में काजी द्वारा करवाये गये तलाक को कानूनी मान्यता दी गई है जिससे तलाकशुदा मुस्लिम महिलाएं भी पेंशन तथा अन्य सरकारी योजना व नौकरी की पात्रता की श्रेणी में है।
10. विधवा महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 8 प्रतिशत तथा परित्यकता को 2 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई है।
11. विधवा पालनहार योजना के अन्तर्गत विधवा महिलाओं के बच्चों '3 से 18 वर्ष तक की उम्र' के लिये पालनहार योजना शुरु की गई है। व नियमों में बदलाव किया गया है जिसके अन्तर्गत पहले 14 वर्ष तक के एक बच्चे को विधवा पालनहार योजना का लाभ मिलता था जो अब 18 वर्ष के तक के तीन बच्चों तक दी जाती है। प्रति बालक की राशि पहले 675 रूपये थी जिसे बढ़ाकर 1000 रूपये कर दिया है.
12. नरेगा मे एकल महिला का अलग से जाॅब कार्ड की व्यवस्था की गई है।

सामाजिक व सांस्कृतिक बदलाव में उपलब्धिया व सफलताऐं:-
जब से एकल नारी शक्ति संगठन बना है तब से एकल महिलाओं की समाजिक सांस्कृतिक स्थिति मे काफी बदलाव हुआ है। वो निम्नलिखित है -
संगठन से जुड़ने के बाद हजारों महिलाओं ने समाज द्वारा प्रतिबन्धित रीवाजों को तोड़ा व स्वयं के व अन्य एकल बहनों के रहन सहन में बदलाव किया। संगठन से जुड़ी सदस्याओं द्वारा अपने बच्चों की शादी विवाह मे शुभ कार्य रस्मों मे अपनी भागीदारी निभा रही है। बिन्दी व मेंहन्दी लगाती है। रंगीन कपड़े पहनने लगी है।
एकल महिलाऐं संगठन से जुड़ने के बाद घर से निकलने लगी है और तीन-चार दिन प्रशिक्षण व सम्मेलनो में भी भागीदारी निभाती है।
समाज की मुख्य धारा मे जुड़कर अपना स्थान बना रही है और सम्मानपूर्ण जीवन जीने के लिए संघर्षरत है।
सरकार की योंजनाओ का लाभ लेकर व नये आयसंवर्धन का कार्य शुरु कर जमीन सम्पत्ति मे अपना हक ले रही है और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है। संगठन से जुड़ने के पश्चात् महिलाएं साक्षरता शिविर मे पढ़ना-लिखना भी सीख रही है और अपना काम स्वयं कर रही है।
राजनैतिक स्थिति मे बदलाव: -
राजस्थान सरकार द्वारा पंचायती राज मे महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण के पश्चात् काफी एकल महिलाओं ने पंचायती राज के तीनों स्तरों के चुनाव लड़े हैं और जीत हासिल की है। जो एकल महिलाऐं संगठन से जुडी है और जनप्रतिनिधी है वो एकल महिलाओं के मुद्दो व समस्याओं पर मजबुती से काम कर रही है। और जो एकल महिलाएं संगठन में नही और एकल है उन्हे संगठन सदस्याएं एकल महिलाओ के मुद्दो पर संवेदनशील कर रही है।
अन्य राज्यों में विस्तार-
संगठन अन्य राज्यों की गरीब एकल महिलाओं को संगठित होने में सहयोग दे रहा है। अभी तक झारखण्ड, हिमाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, पंजाब व महाराष्ट्र में संगठन को सहयोग दे चुका है।