The Association of Strong Women Alone for Widows and Separated Women : Ekal Nari Shakti Sangathan, Udaipur, Rajasthan, India
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एकल नारी शक्ति संगठन

"राजस्थान, भारत में
गरीब विधवा, परित्यकता
व अन्य एकल महिलाओं
का जन-आधारित
विशाल संगठन
जो संगठन व जागरूकता के
माध्यम से आगे बढ़ता ही जा रहा है..."



'तूफानो से आंख मिलाओं, सैलाबो पर वार करो।
मल्लाहो का चक्कर छोड़ो, तैरके दरिया पार करो।।

उद्देश्यः

संगठन की आवश्यकता

सदियों से, भारत में विधवा व एकल महिलाओं का जीवन शोषित, पीड़ित, क्रूर प्रथाओं एवं परम्पराओं से जकड़ा हुआ है। महिलाओं तथा विषेष रुप से गरीब अकेली रह रही एकल महिलाओं को बहुत कम ही अवसर मिलते हैं कि वे सुधार एवं गरिमामय जीवन जी सकें। महिलाओं में शिक्षा का कम स्तर, समाज में व्यापक रूप से फैली हुई पितृसत्तात्मक मूल्य, एकल महिलाओं का संगठित ना होना यह कुछ ऐसे कारण है जिसकी वजह से भारत में एकल महिलाओं की स्थिति निरंतर शोचनीय रही है। आँकलन है कि भारत की समस्त महिलाओं में से 8 प्रतिशत महिलाएं विधवा है। यह संख्या 2008 में लगभग 56,000,000 है। ऐसा नही है कि ये सभी इज्जत से नहीं जी रही हैं लेकिन इनमें से आधी महिलाएं तो इस अधिकार से वंचित है। और यदि हम इस संख्या में तलाकशुदा, परित्यकता व अन्य एकल महिलाओं की संख्या जोड़ दें तो भारत में एकल महिलाओं का प्रतिशत कम से कम 10 प्रतिशत हो जायेगा।

कुछ समाज सुधारकों ने विधवा महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने का कार्य किया था जैसे राजा राममोहन राय (1772-1833), गांधीजी जिन्होंने विधवाओं के गरिमामय जीवन जीने के अधिकार को प्राथमिकता दी तथा प्रयास भी किये। परन्तु इस सूची में ज्यादा नाम नहीं है। समाज धीरे-धीरे परिवर्तित हो रहा है। सरकार ने एकल महिलाओं के पक्ष में कुछ कानून व योजनाएं बनाई है जैसे विधवा पेंशन। किंतु गरीब एकल महिलाओं को ये लाभ लेने में बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता है एवं अधिकांशतः राज्यों में परित्यकता महिलाओं के लिये पेंशन की कोई व्यवस्था ही नहीं है। और 35 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित महिलाओं की समस्याओं के बारे में तो अभी तक सरकार व समाज का ध्यान गया ही नहीं हैं।
एकल महिलाओं के लिये कुछ करने की आवश्यकता थी, लेकिन क्या किया जाये? क्या एकल महिलाओं के लिये आश्रम की व्यवस्था करना, उनकी समस्याओं का खत्म करके उन्हें सम्मानपूर्ण जीवन दे सकता है। शायद नहीं, लेकिन विधवा व अन्य एकल महिलाओं का संगठन जो एक दूसरे के अधिकारों के लिये लड़े तथा सहयोग करे समस्या सुलझाने के लिये विकल्प हो सकता है। इसी सोच के साथ जनवरी 2000 में राजस्थान एकल नारी शक्ति संगठन का गठन हुआ। वर्तमान (मार्च 2013) में राज्य के 32 जिलों के 135 ब्लॉक में 42,472 सदस्य संगठन से जुड़े हुए है।

संगठन का लक्ष्य
सभी समाज की गरीब, एकल महिलाएं पारस्परिक सहयोग से अपनी शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं कानूनी स्थिति में सुधार लाकर सशक्त नागरिक बने और गुणवत्तापूर्ण जीवन जीयें। इस संघर्ष की प्रक्रिया से अपने में और समाज में शक्ति का संचार करे।


संगठन का उद्देश्य

  • एकल महिलाओं को सम्मान से जीने का अधिकार दिलाना।
  • एकल महिलाओं को सम्पत्ति और जमीन का अधिकार दिलाना और उन्हें अत्याचार से मुक्ति दिलाना।
  • एकल महिलाओं में शक्ति का संचार हो सके इसलिये एकल नारी शक्ति संगठन से जोड़ना।
  • एकल महिलाओं का संगठन में ऐसा समन्वयन स्थापित करना जिससे वे एक दूसरे की आवश्यकतानुसार मदद कर सकें।
  • संगठन से जुड़े सदस्यों के साथ मिलकर पारंपरिक कुरीतियों एवं रूढ़ियों को बदलना।
  • एकल नारी हितैषी योजना, कानून लागू करवाना एवं उनका बेहतर क्रियान्वयन करवाना।
  • कानून की नीतियों एवं सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करने के लिये संगठन सदस्यों की मदद करना।
  • सामूहिक प्रयास से आय संवर्धन योजनाओं को लागू करवाना, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ मिल सके।